Rooftop Solar Rules 2026 को लेकर महाराष्ट्र में सोलर पैनल लगाने की तैयारी कर रहे लोगों की चिंता बढ़ सकती है। महाराष्ट्र बिजली नियामक आयोग (MERC) के नए मसौदे में बची हुई बिजली, नए शुल्क और बैटरी को लेकर बड़े बदलाव प्रस्तावित हैं। लेकिन इन नियमों का असर पुराने और नए सोलर ग्राहकों पर अलग-अलग हो सकता है।

महाराष्ट्र में सोलर पैनल लगाने वालों के लिए नए नियम, जानें क्या बदलेगा
महाराष्ट्र में घर की छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली का बिल कम करने की योजना बना रहे लोगों के लिए एक अहम खबर है। महाराष्ट्र बिजली नियामक आयोग (MERC) ने ग्रिड से जुड़े रूफटॉप सोलर सिस्टम के लिए 2026 के नए नियमों का मसौदा जारी किया है।
इसमें अतिरिक्त बिजली का हिसाब, नए शुल्क और बड़े सोलर प्रोजेक्ट के लिए बैटरी की शर्तों में बदलाव प्रस्तावित हैं। हालांकि, ये अभी अंतिम नियम नहीं हैं।
1. सबसे बड़ा बदलाव: अब हर महीने होगा बिजली का हिसाब
नए मसौदे के मुताबिक, 3 किलोवाट से बड़े सोलर प्रोजेक्ट से बनने वाली अतिरिक्त बिजली का हिसाब साल के बजाय हर महीने किया जाएगा।
अगर महीने के आखिर में आपकी कुछ बिजली इस्तेमाल नहीं हुई, तो उसे अगले महीने के बिल में इस्तेमाल करने के लिए जमा नहीं किया जा सकेगा।
इससे उन ग्राहकों को नुकसान हो सकता है जिनके सोलर पैनल से कुछ महीनों में जरूरत से ज्यादा बिजली बनती है।
2. 3 किलोवाट तक के सोलर पैनल लगाने वालों को क्या फायदा?
3 किलोवाट तक के सोलर प्रोजेक्ट के लिए मसौदे में सालाना हिसाब रखने का प्रस्ताव है।
साल के अंत में अगर बिजली बचती है, तो बिजली वितरण कंपनी उसे खरीदेगी। इसके लिए मिलने वाला भुगतान उस समय के सौर बिजली बाजार भाव के आधार पर तय होगा।
इस दर की घोषणा आयोग हर साल करेगा।
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3. अब अतिरिक्त बिजली पर भी लग सकता है शुल्क
नए मसौदे में 10 किलोवाट से ज्यादा की कुल अनुबंधित क्षमता वाले ग्राहकों के लिए अतिरिक्त बिजली के हिसाब से जुड़े शुल्क का प्रस्ताव रखा गया है।
इसमें दो तरह के शुल्क शामिल हो सकते हैं:
- मासिक स्थिर शुल्क: अतिरिक्त बिजली को आगे इस्तेमाल के लिए दर्ज करने पर।
- बिजली के हिसाब से शुल्क: एक समय अवधि में बनी बिजली को दूसरी अवधि में इस्तेमाल करने पर।
हालांकि, इन शुल्कों की दरें अभी तय नहीं हुई हैं।

4. बड़े सोलर प्रोजेक्ट के लिए बैटरी जरूरी हो सकती है
100 किलोवाट से बड़े सोलर प्रोजेक्ट के लिए बैटरी स्टोरेज सिस्टम लगाने का प्रस्ताव है।
मसौदे में दो विकल्प दिए गए हैं:
- प्रोजेक्ट की 50% क्षमता के बराबर बैटरी, जो 2 घंटे तक बिजली स्टोर कर सके।
- प्रोजेक्ट की 25% क्षमता के बराबर बैटरी, जो 4 घंटे तक बिजली स्टोर कर सके।
हालांकि, ठीक 100 किलोवाट के प्रोजेक्ट पर यह शर्त लागू होगी या नहीं, इस बारे में स्पष्टता जरूरी है।
5. हाउसिंग सोसायटी मिलकर लगा सकेंगी सोलर प्रोजेक्ट
नई व्यवस्था में हाउसिंग सोसायटी और दूसरे पात्र ग्राहक मिलकर किसी दूसरी जगह पर सोलर प्रोजेक्ट लगाने का विकल्प चुन सकते हैं।
लेकिन इसके लिए कुछ शर्तें होंगी:
- प्रोजेक्ट की न्यूनतम क्षमता 100 किलोवाट होनी चाहिए।
- सभी ग्राहक एक ही बिजली वितरण कंपनी के क्षेत्र में होने चाहिए।
- सभी ग्राहक एक ही श्रेणी में आने चाहिए।
इस व्यवस्था में बिजली के ट्रांसमिशन शुल्क और बिजली की हानि को भी लाभ की गणना में शामिल किया जाएगा।
6. जिन लोगों ने पहले से सोलर पैनल लगाए हैं, उनका क्या होगा?
मसौदे के मुताबिक, मौजूदा ग्राहकों के पुराने समझौते उनकी तय अवधि तक सुरक्षित रहेंगे।
लेकिन अगर कोई ग्राहक अपने सोलर प्रोजेक्ट की क्षमता या डिजाइन बदलता है, या बिजली मापने का तरीका बदलता है, तो उस पर नए नियम लागू हो सकते हैं।
बिजली विशेषज्ञ सुधीर बुधे ने मांग की है कि पुराने प्रोजेक्ट के फायदे सुरक्षित रखे जाएं और नए नियम सिर्फ बढ़ाई गई क्षमता पर लागू हों।
उन्होंने नए शुल्क और बैटरी अनिवार्यता पर भी दोबारा विचार करने की बात कही है।
7. 12 अक्टूबर तक दे सकते हैं अपनी राय
MERC के इस मसौदे पर आम लोगों और संबंधित पक्षों को 12 अक्टूबर 2026 तक अपनी आपत्तियां और सुझाव देने का मौका मिलेगा।
बिजली विशेषज्ञ अशोक पेंडसे के अनुसार, प्रस्तावित नियमों से नए सोलर ग्राहकों को मिलने वाला फायदा कम हो सकता है। इससे लोग नया सोलर प्रोजेक्ट लगाने का फैसला टाल भी सकते हैं।
फिलहाल ये केवल प्रस्ताव हैं। आयोग का अंतिम फैसला आने के बाद ही साफ होगा कि नए नियम किस रूप में लागू होंगे।
ध्यान दें
अभी ये अंतिम नियम नहीं हैं। 12 अक्टूबर 2026 तक मसौदे पर सुझाव और आपत्तियां दी जा सकती हैं। अंतिम नियमों में बदलाव संभव है।
Source: Loksatta

